poems in hindi motivational poem in hindi

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आज सब लोग कोई न कोई poems in hindi पढ़ना चाहता हे .आज हमको google पर सर्च करने के बाद कोई भी लिस्ट की तरह नहीं मिलती आज में आपोको इस पोस्ट में हिंदी की कविताये के बारे में बताता हु .

आपको में बतादू तो हिंदी कविताये क्या हे विकिपीडिया पर जाकर सर्च कर सकते हे


हमारे इधर poems के बहुत सरे फायदे हे .यह हिंदी कविताये सिर्फ जानकारी भी नहीं प्रदान करती ये हिंदी कविता हमको द्यान भी देते हे .आपको आज poems पाठ करना या आपने बच्चे को पथ करवाना यह बहुत हीओ अछि बात हे आज आयेयी हम कुछ मजेदार कविताये और कुछ हमको अछि कविताये पर नजर डालते हे .
चलो आज हम आपको कुछ अछि कवितओंको भी बताते हे . और यह हिंदी कविता आपने बच्चे को भी सुना सकते हे .

poems in hindi चयन कसे करे

सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह हे की आज के समय में बहुत सरे लोग हे जो कविता पढ़ना पसंद करते हे . एक अची कविता कसे चयन करे यह हम आपको बताते हे . कविता चयन करके से पहले आप आपने बारे में एक बार ज़रुए सोचना की हमको किस तरह की कविअता पढ़ना पसंद हे . हिंदी कविता में बहुत सारे इसे भी कविता के प्रकार हे जो आपको पता भी नहीं हे आज के समय हम ज्यादा त्र मनोरजन वाली ,कुछ नई और कुछ कविता जो आपके पसंद वाले कविताकरोने के लिखी हे . आज के इस समय में कविता का महत्व बहुत ज्यादा हे . आप उह कविताएँ अपने बच्चे को भी सुना सकती हे.

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Love Poem In Hindi


हुआ था हमे भी प्यार कई बार
लेकिन एक बार में एक से ही हुआ था इकरार
दिल तभी खोजा दूजा, जब मिला था प्यार में इंकार

जोड़ना था दिल हमे हर बार, लेकिन ये टूट ही जाता बार-बार
कभी उम्र ने इज़ाज़त नहीं दी तो कभी मजबूरियों ने मारा था
कसम उस खुदा की हरबार पूरी शिद्धत से हमने मोहब्बत निभाया था

हुआ था हमे भी प्यार कई बार;
कभी प्यार को हम समझ नहीं पाए
कभी प्यार ने हमे खुद ही खूब समझाया था;

चलती रही खेल यूँ ही मेरे और प्यार के बिच
कभी मै तो कभी प्यार ने मन बहलाया था
लेकिन दिल था मेरा जो अधूरा रहा हर बार

हुआ था हमे भी प्यार कई बार
चाहा उसको जो कभी मिल ही न पाया
जो मिला, उसको संभाल नहीं पाया

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motivational poem in hindi

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, बार बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली हर एक बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

हरिवंशराय बच्चन

गिरना भी अच्छा है

“गिरना भी अच्छा है,
औकात का पता चलता है…
बढ़ते हैं जब हाथ उठाने को…
अपनों का पता चलता है!

जिन्हे गुस्सा आता है,
वो लोग सच्चे होते हैं,
मैंने झूठों को अक्सर
मुस्कुराते हुए देखा है…

सीख रहा हूँ मैं भी,
मनुष्यों को पढ़ने का हुनर,
सुना है चेहरे पे…
किताबो से ज्यादा लिखा होता है…!

कोने में बैठ कर क्यों रोता है

कोने में बैठ कर क्यों रोता है,
यू चुप चुप सा क्यों रहता है।

आगे बढ़ने से क्यों डरता है,
सपनों को बुनने से क्यों डरता है।

तकदीर को क्यों रोता है,
मेहनत से क्यों डरता है।

झूठे लोगो से क्यों डरता है,
कुछ खोने के डर से क्यों बैठा है।

हाथ नहीं होते नसीब होते है उनके भी,
तू मुट्ठी में बंद लकीरों को लेकर रोता है।

भानू भी करता है नित नई शुरुआत,
सांज होने के भय से नहीं डरता है।

मुसीबतों को देख कर क्यों डरता है,
तू लड़ने से क्यों पीछे हटता है।

किसने तुमको रोका है,
तुम्ही ने तुम को रोका है।

भर साहस और दम, बढ़ा कदम,
अब इससे अच्छा कोई न मौका है।

Rating: 1 out of 5.

kids poems in hindi

चिड़ियों के थे बच्चे चार

चिड़ियों के थे
बच्चे चार,
निकले घर से
पंख पखार।

पूरब से
पश्चिम को आए,
उत्तर से
दक्षिण को जाएं।

उत्तर दक्षिण
पूरब पश्चिम,
देख लिया
हमने जग सारा।

अपना घर
खुशियों से भरा,
सबसे न्यारा
सबसे प्यारा।

तितली रानी बड़ी सयानी

तितली रानी बड़ी सयानी,
रंग बिरंगे फूलों पर जाती है।

फूलों से रंग चुरा कर,
अपने पंखों को सजाती है।

कोई हाथ लगाए,
तो छूमंतर हो जाती है।

पंखों को फड़फड़ा कर,
हर फूल पर वो मंडराती है।

घूम-घूम कर सारे फूलों की,
खुशबू वो ले जाती है।

फूलों का मीठा रस पीकर,
दूर जाकर पंखों को सहलाती है।

रंग बिरंगी तितली रानी,
बड़ी सयानी।

छुक छुक करती रेलगाड़ी आयी

छुक छुक करती रेलगाड़ी आयी,
पो पो पी पी सीटी बजाती आयी,
इंजन है इसका भारी-भरकम।

पास से गुजरती तो पूरा स्टेशन हिलाती,
धमधम धमधम धमधम धमधम,
पहले धीरे धीरे लोहे की पटरी पर चलती।

फिर तेज गति पकड़ कर छूमंतर हो जाती,
लाल बत्ती पर रुक जाती,
हरी बत्ती होने पर चल पड़ती।

देखो देखो छुक छुक करती रेलगाड़ी,
काला कोट पहन टीटी इठलाता,
सबकी टिकट देखता फिरता।

भाग भाग कर सब रेल पर चढ जाते,
कोई टूट न पाए इसलिए,
रेलगाड़ी तीन बार सीटी बजाती।

छुक छुक करती रेलगाड़ी आयी।

आओ हम सब झूला झूलें

आओ हम सब झूला झूलें
पेंग बढ़ाकर नभ को छूलें

है बहार सावन की आई
देखो श्याम घटा नभ छाई

अब फुहार पड़ती है भाई
ठंडी – ठंडी अति सुखदायी

आओ हम सब झूला झूलें
पेंग बढ़ाकर नभ को छूलें

कुहू – कुहू कर गाने वाली
प्यारी कोयल काली – काली

बड़ी सुरीली भोली – भाली
गाती फिरती है मतवाली

हम सब भी गाकर झूलें
पेंग बढ़ाकर नभ को छूलें

मोर बोलता है उपवन में
मास्त हो रहा है नर्तन में

चातक भी बोला वन में
आओ हम सब झूला झूलें
पेंग बढ़ाकर नभ को छूलें

Rating: 1 out of 5.

harivansh rai bachchan poems in hindi

अग्निपथ agneepath

poems in hindi

वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने हों बड़े,
एक पत्र छाँह भी,
माँग मत, माँग मत, माँग मत,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।


तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।


यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रु श्वेत रक्त से,
लथपथ लथपथ लथपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

नीड़ का निर्माण

नीड़ का निर्माण फिर-फिर,
नेह का आह्णान फिर-फिर।

वह उठी आँधी कि नभ में
छा गया सहसा अँधेरा,
धूलि धूसर बादलों ने
भूमि को इस भाँति घेरा,

रात-सा दिन हो गया, फिर
रात आ‌ई और काली,
लग रहा था अब न होगा
इस निशा का फिर सवेरा,

रात के उत्पात-भय से
भीत जन-जन, भीत कण-कण
किंतु प्राची से उषा की
मोहिनी मुस्कान फिर-फिर

नीड़ का निर्माण फिर-फिर,
नेह का आह्णान फिर-फिर।

वह चले झोंके कि काँपे
भीम कायावान भूधर,
जड़ समेत उखड़-पुखड़कर
गिर पड़े, टूटे विटप वर,

हाय, तिनकों से विनिर्मित
घोंसलो पर क्या न बीती,
डगमगा‌ए जबकि कंकड़,
ईंट, पत्थर के महल-घर

बोल आशा के विहंगम,
किस जगह पर तू छिपा था,
जो गगन पर चढ़ उठाता
गर्व से निज तान फिर-फिर

नीड़ का निर्माण फिर-फिर,
नेह का आह्णान फिर-फिर।

क्रुद्ध नभ के वज्र दंतों
में उषा है मुसकराती,
घोर गर्जनमय गगन के
कंठ में खग पंक्ति गाती;

एक चिड़िया चोंच में तिनका
लि‌ए जो जा रही है,
वह सहज में ही पवन
उंचास को नीचा दिखाती

नाश के दुख से कभी
दबता नहीं निर्माण का सुख
प्रलय की निस्तब्धता से
सृष्टि का नव गान फिर-फिर

नीड़ का निर्माण फिर-फिर,
नेह का आह्णान फिर-फिर।

पथ की पहचान

पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले
पुस्तकों में है नहीं छापी गई इसकी कहानी,
हाल इसका ज्ञात होता है न औरों की जबानी,
अनगिनत राही गए इस राह से, उनका पता क्या,
पर गए कुछ लोग इस पर छोड़ पैरों की निशानी,
यह निशानी मूक होकर भी बहुत कुछ बोलती है,

खोल इसका अर्थ, पंथी, पंथ का अनुमान कर ले।
पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।

है अनिश्चित किस जगह पर सरित, गिरि, गह्वर मिलेंगे,
है अनिश्चित किस जगह पर बाग वन सुंदर मिलेंगे,
किस जगह यात्रा खतम हो जाएगी, यह भी अनिश्चित,
है अनिश्चित कब सुमन, कब कंटकों के शर मिलेंगे
कौन सहसा छूट जाएँगे, मिलेंगे कौन सहसा,

आ पड़े कुछ भी, रुकेगा तू न, ऐसी आन कर ले।
पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।
कौन कहता है कि स्वप्नों को न आने दे हृदय में,
देखते सब हैं इन्हें अपनी उमर, अपने समय में,
और तू कर यत्न भी तो, मिल नहीं सकती सफलता,
ये उदय होते लिए कुछ ध्येय नयनों के निलय में,
किंतु जग के पंथ पर यदि, स्वप्न दो तो सत्य दो सौ,

स्वप्न पर ही मुग्ध मत हो, सत्य का भी ज्ञान कर ले।
पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।

स्वप्न आता स्वर्ग का, दृग-कोरकों में दीप्ति आती,
पंख लग जाते पगों को, ललकती उन्मुक्त छाती,
रास्ते का एक काँटा, पाँव का दिल चीर देता,
रक्त की दो बूँद गिरतीं, एक दुनिया डूब जाती,
आँख में हो स्वर्ग लेकिन, पाँव पृथ्वी पर टिके हों,

कंटकों की इस अनोखी सीख का सम्मान कर ले।
पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।
यह बुरा है या कि अच्छा, व्यर्थ दिन इस पर बिताना,
अब असंभव छोड़ यह पथ दूसरे पर पग बढ़ाना,
तू इसे अच्छा समझ, यात्रा सरल इससे बनेगी,

सोच मत केवल तुझे ही यह पड़ा मन में बिठाना,
हर सफल पंथी यही विश्वास ले इस पर बढ़ा है,

तू इसी पर आज अपने चित्त का अवधान कर ले।
पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।

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hindi diwas par kavita poems in hindi

‘हिन्दी हमारी राष्ट्रीय भाषा’

हिन्दी-हिन्दु-हिन्दुस्तान,

कहते है, सब सीना तान,

पल भर के लिये जरा सोचे इन्सान

रख पाते है हम इसका कितना ध्यान,

सिर्फ 14 सितम्बर को ही करते है

अपनी राष्टृ भाषा का सम्मान

हर पल हर दिन करते है हम

हिन्दी बोलने वालो का अपमान

14 सितम्बर को ही क्यों

याद आता है बस हिन्दी बचाओं अभियान

क्यों भूल जाते है हम

हिन्दी को अपमानित करते है खुद हिन्दुस्तानी इंसान

क्यों बस 14 सितम्बर को ही हिन्दी में

भाषण देते है हमारे नेता महान

क्यों बाद में समझते है अपना

हिन्दी बोलने में अपमान

क्यों समझते है सब अंग्रेजी बोलने में खुद को महान

भूल गये हम क्यों इसी अंग्रेजी ने

बनाया था हमें वर्षों पहले गुलाम

आज उन्हीं की भाषा को क्यों करते है

हम शत् शत् प्रणाम

अरे ओ खोये हुये भारतीय इंसान

अब तो जगाओ अपना सोया हुआ स्वाभिमान

उठे खडे हो करें मिलकर प्रयास हम

दिलाये अपनी मातृभाषा को हम

अन्तरार्ष्टृीय पहचान

ताकि कहे फिर से हम

हिन्दी-हिन्दु-हिन्दुस्तान,

कहते है, सब सीना तान||

——– वन्दना शर्मा

‘हिंदी का सम्मान’

हिंदी का सम्मान करो, यह हमारी राज भाषा,

मिलाती देशवाशियों के दिलों को यह, पूरी करती अभिलाषा।

देखो प्रेमचंद और भारतेन्दु के यह हिंदी साहित्य,

जो लोगो के जीवन में ठहाको और मनोरंजन के रंग भरते नित्य|

हिंदी भाषा की यह कथा पुरानी लगभग एक हजार वर्ष,

जो बनी क्रांति की ज्वाला तो कभी स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष|

आजाद भारत में भी इसका कम नही योगदान,

इसलिए हिंदी दिवस के रुप में इसे मिला यह विशेष स्थान|

विनती बस यही हिंदी को ना दो तुम यह दोयम दर्जे का मान,

हिंदी से सदा करो प्रेम तुम दो इसे विशेष सम्मान|

रोज मनाओ तुम हिंदी दिवस बनाओ इसे अपना अभिमान,

हिंदी है हमारी राजभाषा इसलिए दो इसे अपने ह्रदयों में विशेष स्थान|

अंग्रेजी की माला जपकर ना करो हिंदी का अपमान,

आओ मिलकर सब प्रण ले नित्य करेंगे हिंदी का सम्मान|

                          ———– योगेश कुमार सिंह

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mother poems in hindi

माँ के हाथ 

पाया है प्यार जिससे , वही है माँ तेरे हाथली थी जब  सांस  पहली , माँ के हाथो ने ही मुझे थामाँ
कदम उठाया पहला, तब माँ  के  हाथों ने ही चलना सिखायाजब कभी भी गिरेंगे आंसू मेरी आँखों से


तेरे हाथ ही मुझे पकड़ लेंगेजब लगेगी कोई चोट मुझे
तेरे हाथो से ही होगा ठीक मुझेपाया है प्यार जिससे , वही है माँ तेरे हाथ

मेरी माँ ही भगवान

मेरी माँ ही मेरे लिए भगवान हैउसके चरणों में ही स्वर्ग है
सुखी हु में जब से उसके हाथ मेरे माथे पर हैउसके बिना मेरा जीवन कहा आसान  है


बहोत से रिश्ते है मेरे जीवन मेंपर मेरी माँ का ही स्थान सबसे ऊपर है
मेरा परमेश्वर खुश ही हैअगर मेरी माँ खुश है

Rating: 1 out of 5.

आज poems in hindi हमरे जीवन का एक अविभाज्य घटक बन गया हे . आज के इस समय में हम poemsपढ़ना पसंद करते हे . हम आज आपको यह बताते हे की कविताये पढ़ना बहुत अच्छा हे आज हम आपको poems के बारे में जो जानकारी मिलती हे हम ओ आपको बताते हे

हम इसी न्तारिके की poems in hindi पढ़नी हे तो आप हमें निचे कम्मेंट करके भी बता सकते हे .

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